आई.टी.आई. पार्क स्थित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित, मंत्री विश्वास कैलाश सारंग सहित गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
भोपाल, 20 फरवरी 2026। भाई उद्धवदास मेहता स्मृति न्यास (रजि.), टी.टी. नगर, भोपाल द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र सेनानी एवं प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य पंडित उद्धवदास मेहता की 40वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रातः 10:00 बजे आई.टी.आई. पार्क (कमला पार्क के सामने) स्थित उनकी प्रतिमा स्थल पर संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पं. मेहता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके राष्ट्रसेवा और सामाजिक समर्पण को स्मरण किया। मंत्री श्री सारंग ने अपने उद्बोधन में कहा कि पं. उद्धवदास मेहता का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ समाज जागरण और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में जो योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।
मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा-
कार्यक्रम में न्यास के पदाधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
पं. उद्धवदास मेहता: राष्ट्रसेवा और समाजसेवा का समर्पित जीवन
पंडित उद्धवदास मेहता भोपाल के सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष रूप से भोपाल विलिनीकरण आंदोलन में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा, जब रियासतों के एकीकरण का दौर चल रहा था।
वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भोपाल के प्रथम संचालक रहे और समाज में संगठन, अनुशासन एवं राष्ट्रभावना को मजबूत करने के लिए सतत कार्य करते रहे।
एक प्रख्यात आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में भी उन्होंने समाज की निस्वार्थ सेवा की। जरूरतमंदों का उपचार करना, जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना और समाज के कमजोर वर्गों के बीच सेवा कार्य करना उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा।
उनका संपूर्ण जीवन सादगी, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा।
श्रद्धांजलि सभा में संकल्प
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनों ने पं. मेहता के आदर्शों पर चलने तथा राष्ट्रहित एवं समाजहित में कार्य करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों की स्मृति न केवल इतिहास का हिस्सा है, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन भी है।
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